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राम जी की खड़ाऊं लेकर साक्षात प्रकट हुए भरत जी, सुनकर रह जाएंगे हैरान





क्या हुआ जब अचानक से अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रभु श्री राम की चरण पादुकाएं लेकर प्रकट हो गए साक्षात भरत जब प्रभु श्री राम वन वास के लिए रवाना हुए थे तब भरत ने उनकी चरण पादुकाओं को राज्य सिंहासन पर रखकर शासन चलाया था और जब प्रभु श्री राम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके पुनः अयोध्या लौटे थे तब इसी चरण पादुका को धारण करके कई हजार सालों तक अयोध्या पर राज किया और अब जब एक बार फिर से कलयुग में श्री राम अयोध्या आने वाले हैं रामराज लाने वाले हैं तो उनके भ्राता भरत आखिर कैसे पीछे रह सकते थे
 आखिर अयोध्या में कैसे प्रकट हुई दिव्य चरण पादुका.... जानकर आपके भी होश उड़ जाएंगे
 अयोध्या में रामलीला की प्राण प्रतिष्ठा के 1 दिन बाद राम मंदिर के द्वार खुलते ही 5 लाख से अधिक श्रद्धालु वहां एकत्र हुए। कुछ लोगों ने  बैरिकेड तोड़ दिए जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। परिसर में और उसके आसपास तैनात 8000 मजबूत पुलिस दल  ने भीड़ को  नियंत्रित किया।  प्रतिष्ठा समारोह से पहले ही लगभग 1.5  लाख से अधिक भक्त अयोध्या पहुंच गए थे।  

और धर्मशालाओं में रह रहे थे कुछ लोगों ने खुले आसमान के नीचे रात बिताई लेकिन उनका लक्ष्य था रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहले सुबह दर्शन करना. 23 जनवरी को राम मंदिर के दरवाजे आम श्रद्धालुओं के लिए खुलते ही लोगों की इस भीड़ में एक शख्स ऐसा भी था जिसने अपने सर पर दिव्य चरण पादुकाएं उठा रखी थी. वह भीड़ में निरंतर मंदिर के अंदर जाने का प्रयास कर रहा था.  कई लोगों ने उसे देखा तब तो उसका कहना था कि वह दिव्य चरण पादुकाएं प्रभु श्री राम को भेंट करने के लिए लाया है क्योंकि यह उनकी ही चरण पादुकाएं हैं. राघव नाम के एक भक्त का कहना था कि वह शख्स जिसने चरण पद का अपने सर पर उठाई थी हुई थी वह हमारे साथ कई घंटे तक दर्शन के लिए इंतजार में खड़े रहे. 
उस दिन तकरीबन 5 लाख श्रद्धालु अयोध्या राम मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचे थे और तकरीबन 4 से 5 घंटे तक वह शख्स उस दिव्य चरण पादुका को अपने सर पर उठाए हुए था. उनका एक ही कहना था कि वह यह चरण पादुकाएं प्रभु श्री राम के लिए लाए हैं और उन्हें सौंप कर ही अपना कर्तव्य पूरा करेंगे. जब तकरीबन चार से पांच घंटे इंतजार करने के बाद हमें रामलीला के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ उसी समय भी वह व्यक्ति मेरे साथ था उन्होंने चरण पादुका प्रभु श्री राम के गर्भ गृह के सामने रख दी जब मैंने उनसे उनका नाम पूछा पूछना चाहा तब उन्होंने कहा कि मैं यहां से 14 किलोमीटर दूर भरतपुर से आया हूं और अचानक कहीं अंतर ध्यान हो गए,यह चमत्कार अपनी आंखों के सामने देखकर कार्तिक के भी होश उड़ गए उन्होंने रामलीला के दर्शन किए और तुरंत ही भरत कुंड के लिए रवाना हो गए जो कि वहां से 14 किलोमीटर दूर स्थित है. आगे वीडियो में हम बताएंगे कि वह दुर्लभ इंसान आखिर कौन थे और भरत कुंड पर पुणे कैसे कार्तिक की उनके साथ मुलाकात हुई लेकिन उससे पहले हम भारत कुंड के अस्तित्व को अच्छी तरह से जान लेते हैं

 पवित्र नगरी अयोध्या में एक तरफ भव्य राम मंदिर बन रहा है तो दूसरी तरफ राजाराम के अनुज भारत की तपोस्थली नंदीग्राम के भारत कुंड की चर्चा तेज है .त्रेता युग में भगवान राम का राज्याभिषेक हुआ था तो इसी भारत कुंड से पवित्र तीर्थ का जाल डाला गया था और  इसी स्थान पर तप करते हुए भारत ने प्रभु श्री राम का इंतजार किया था भरत में 14 साल अपने भाई राम की प्रतीक्षा में तपस्या की थी माना जाता है कि भारत ने यह सोचकर कि जब उनके राम, वनवास में है और जमीन पर चलेंगे और वहीं सोएंगे तो भरत कैसे अपने बड़े भाई के जैसे जीवन व्यतीत कर सकते हैं यह सोचकर उन्होंने यहां एक गुफा बनाई जो जमीन से लगभग आठ सीढ़ी नीचे है, यहीं उन्होंने 14 साल तक तप किया जब 14 वर्ष की वनवास के लिए राज पाठ छोड़कर चले तो भरत उनको मनाने गए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम अपने पिता के वचन से बंधे थे लौटना स्वीकार नहीं किया लेकिन भरत के अनुरोध पर अपनी चरण पादुका उनको सौंप दी
 नंदीग्राम में भारत श्री राम जी की खड़ाऊ को प्रतीक के तौर पर लेकर अयोध्या का राजपाठ चलाने लगे. 14 वर्ष वनवास खत्म होने पर जब राम अयोध्या वापस लौटे तो यहीं पर भरत से मिले तो भरत ने उन्हें उनकी चरण पादुका दे दी और जब पुन: राम अयोध्या लौट  चुके हैं तो हो सकता है भारत उन्हें चरण पादुका लौटाने अयोध्या आए हो... जब कार्तिक भारत कुंड पर पहुंचा तो भरत कुंड प्रभु राम के आने की खुशी में पूरी तरह से सजा हुआ था तभी कार्तिक जी को रहस्यमय तरीके से वही भक्त भरत कुंड में स्नान करता हुआ दिखा जो चरण पादुका लिए अयोध्या राम मंदिर में मौजूद था
 इसके बाद कार्तिक में उनसे पूछा कि आप अयोध्या में रहस्यमयी तरीके से कहां गायब हो गए थे और आप यहां पर क्या कर रहे हैं। तो उसे उस भक्त ने कहा कि हमारे पूर्वज कई सालों से इसी भरत कुंड के आसपास ही निवास करते हैं और प्रभु श्री राम के भाई भरत को अपना इष्ट मानते हैं एक दिन रात्रि के समय स्वयं भरत हमारे सपने में आए और उन्होंने हमसे कहा कि भरत कुंड की गुफा के अंदर एक दिव्य चरण पादुका रखी  हुई है उसे ले जाकर अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर के अंदर रखना होगा वहां प्रभु श्री राम अपना राज सिंहासन संभालेंगे जब हमारी आंखें खुली तो स्वप्न के अनुसार अपने राजा का आदेश मानते हुए हम उसे चरण पादुका को अपने सिर पर रखकर अयोध्या धाम के लिए रवाना हो गए और जब राम मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खुल गया तब हमने वह दिव्य चरण पादुका प्रभु श्री राम को समर्पित कर दी.. अयोध्या में दिन प्रतिदिन ऐसे कई दिव्य चमत्कार लगातार हो रहे हैं. हाल ही में  22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान राम लाल की प्राण प्रतिष्ठा हुई इसके अगले ही दिन लाखों लोग दर्शन को उमड़ पड़े तब से भक्तों के आने का सिलसिला जारी है

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