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राज्यों के पास कमी तो प्राइवेट अस्पतालों में कैसे मिल रही वैक्सीन!

Que: सरकार के पास वैक्सीन नहीं तो प्राइवेट         अस्पतालों में कैसे पहुंच रही?

Ans: 1 मई को लागू की गई सरकार की नीति के मुताबिक वैक्सीन निर्माता 50% तक वैक्सीन राज्य सरकारोंं को या खुलेेे बाजार में पहले से तय दाम पर बेच सकते है। 18 साल से अधिक के लोगों को वैक्सीन देने के लिए राज्य सरकार सीधे निर्माता से वैक्सीन खरीद सकते हैं और भारत सरकार पहले की तरह फ्रंटलाइन वर्कर, 45 साल से अधिक के लोगों या दूसरे जरूरतमंद लोगों को वैक्सीन मुफ्त में देती रहेगी।
जानकारों का कहना है कि इसी नीति के कारण यह समस्या आई है की वैक्सीन प्राइवेट अस्पतालों में है और राज्य सरकारों के पास नहीं।
 पब्लिक हेल्थ फाउंड इंडिया के अध्यक्ष प्रोफेसर के• श्रीनाथ रेड्डी कहते है कि यदि वैक्सीन सप्लाई पूरी होती तो इस बात को समझा जा सकता था लेकिन जब 45 से ऊपर के लोगों और comorbidity के लोगों को भी वैैैक्सीन नहीं मिल रही है तो प्राइवेट सेक्टर को अभी वरीयता देना सही नहीं है। यह भी मुमकिन है कि प्राइवेट अस्पताल राज्य सरकारों के मुकाबले अधिक पैसे देकर ज्यादा संख्या में वैक्सीन खरीद सकते हैं।
 रेडी कहते हैं जब वैक्सीन की खरीद सीधे निर्माता से है तो मुमकिन है कि निर्माता प्राइवेट अस्पताल को वैक्सीन महंगे दामों पर बेच देंगे क्योंकि वह राज्य सरकारों से अधिक पैसे देने को तैयार हो सकते हैं।
वे कहते हैं कि वैक्सीन की खरीद हमेशा से ही केंद्र सरकार करती रही है और वही इसका वितरण भी करती है। इस तरह की विकेंद्रित सप्लाई मुमकिन ही किसी अन्य बड़े देश में होती हो।
अभी हालात ऐसे नहीं है कि वैक्सीन को मार्केट के भरोसे छोड़ा जाए। रेडी कहते हैं कि अभी छोटे शहरों व गांवों में प्राइवेट अस्पताल नहीं है।वहां तक वैक्सीन की सप्लाई, सरकारों को ही पहुंचाना है तो राज्य सरकार और प्राइवेट सेक्टर को एक जैसा महत्व नहीं दिया जा सकता है। ऐसा कर आप गरीब, छोटे शहरों व गांवों के लोगों के साथ भेदभाव कर रहे हैं।

Que: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से वैक्सीन को लेकर क्या सवाल किए?

Ans: जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने बुधवार को जारी 32 पन्नों के आदेेेश में कहा की टीकाकरण अभियान के पहले दो चरणों में चालक की सीट पर केंद्र था। टीकाकरण भी नि:शुल्क किया गया। हालांकि दूसरी लहर की शुरुआत 
और 18–44 वर्ग समूह को कवर करनेेेे के लिए टीकाकरण अभियान के विस्तार ने केंद्र को जमीन दी और केवल 50% वैक्सीन खरीद और वितरण की जिम्मेदारी ली। जिससे राज्यों और निजी अस्पतालोंं को उच्च कीमत पर  टीका खरीदने के लिए छोड़ दिया गया।

 केंद्र सरकार की नीति प्रथम दृष्टया मनमानी और तर्कहीन है : सुप्रीम कोर्ट
✓बेंच ने पूछा कि "क्या केंद्र ने पहले ही यह पता लगाने के लिए "साधन परीक्षण" किया था कि क्या 18 से 44 आयु वर्ग के 50% भी अपने टीकों के लिए भुगतान कर सकते हैं?"
✓ अगर वैक्सीन खरीदना ही मकसद है तो केंद्र सरकार खुद को 45 वर्ष के लोगों तक सीमित क्यों रख रही है? 45 से कम वालों को राज्यों के भरोसे क्यों छोड़ रही है?

✓गरीब व पिछड़े वर्गों को कैसे देख रहे हैं?

Que: वैक्सीन पॉलिसी को लेकर सरकार का क्या पक्ष रहा है?

Ans: वैक्सीन को लेकर सरकार अपनी नीतियों का बचाव करती रही है। नीति आयोग की तरफ से 1 मई को जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि स्वास्थ राज्यों का विषय रहा है और लिबरलाइज्ड वैक्सीन पॉलिसी,राज्यों द्वारा लगातार किए गए अनुरोध के बाद लाई गई है। इस प्रेस रिलीज केेे मुताबिक केंद्र सरकार को दी जाने वाली वैक्सीन के अलावा 25–25% वैक्सीन राज्यों तथा प्राइवेट अस्पतालों को मिल रही हैंं।लेकिन वैक्सीन को लगाई जाने वाली मुश्किलों के कारण कई लोगों को वैक्सीन नहीं मिल पा रही रही है।
 प्राइवेट में सिर्फ 7% और सरकारी केंद्रों में 95% तक वैक्सीन का उपयोग हुआ है।

Que: क्या प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन उसी रेट पर मिल रही है जिस रेट पर राज्यों को मिलती है?

Ans: दिल्ली के एक अस्पताल के कर्मचारी के अनुसार हर कंपनी के साथ दवाइयों को लेकर मोलभाव होता है, और जो रेट तय होता है उसी पर ही वैैक्सीन ली जाती है। वैसे वैक्सीन लोगों को सरकार के तय रेट केे मुताबिक ही दी जा रही है।राज्यों को किस रेट में वैक्सीन मिल रही है इस बात की जानकारी नहीं हैै। 

Que: क्या 18 से 44 साल के लोगों को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है?

Ans: केंद्र सरकार ने अब 18 से 44 आयु वर्ग केेेेे टीकाकरण के लिए वॉक इन पंजीकरण यानी टीकाकरण केंद्रों पर जाकर पंजीकरण करवाने की सुविधा दी हैैै, हालांकि अभी के लिए यह विकल्प केवल केंद्र सरकार द्वारा संचालित कोविड टीकाकरण केंद्रों पर खुला है।निजी टीकाकरण केंद्रों  पर वॉक इन टीकाकरण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
 स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा कि 18 से 44 आयु वर्ग के टीकाकरण के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट अनिवार्य  करने से अब तक टीकाकरण केंद्रों पर भीड़ भाड़ को रोका जा सका है। लेकिन वैक्सीन की बर्बादी को रोकने के लिए अब इस आयु वर्ग के लिए वॉक इन पंजीकरण खोल दिया गया है।हालांकि केंद्र ने संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को इस मामले पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार दिया है। 


Que: छूट मिलने पर 100% वैक्सीन क्यों नहीं  खरीद रही केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट

Ans: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि निर्माता उसे कोविड-19 टीके, भारी छूट पर बेच रहे हैं। क्योंकि यह थोक(बड़ी मात्रा) में ऑर्डर देते है। जिस पर कोर्ट ने सरकार से सवाल पूछा कि वह राज्यों को अपने लिए छोड़ने के बजाय छूट पर 100% टीके क्यों नहीं खरीद सकती?
केंद्र ₹150 में टीके खरीद सकता है जबकि राज्यों को ₹300 और ₹600 के बीच खर्च करने के लिए छोड़ दिया।
2021-22 के केंद्रीय बजट में  वैक्सीन के लिए 35000 करोड रुपए रखे गए हैं। इन पैसों को केंद्र ने अब तक कैसे खर्च किया और 18 से 44 आयु वर्ग के व्यक्तियों के टीकाकरण के लिए इनका उपयोग क्यों नहीं किया जा सकता है?
अदालत ने इन बातों को स्पष्ट करने के निर्देश देते हुए कहा कि केंद्र ने राज्यों के लिए टीकों की मात्रा और कीमत दोनों को निर्माताओं के साथ पूर्व निर्धारित करके बहुत कम सौदेबाजी की शक्तियों के साथ राज्यों को छोड़ दिया है।
प्रथम दृष्टया , दो वैक्सीन निर्माताओं [सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक] के साथ बातचीत के लिए एकमात्र गुंजाइश कीमत और मात्रा पर थी, दोनों को केंद्र सरकार ने पहले से तय किया है," अदालत ने तर्क दिया।

राज्य विदेशी वैक्सीन निर्माताओं के साथ अपनी सीधी बातचीत में अक्षम थे क्योंकि बाद वाले देशों की संघीय सरकारों के साथ बातचीत करना पसंद करते थे।
 पीठ ने अगले दो हफ्तों के भीतर केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मुक्त टीकाकरण के लिए अपनी नीतियों को स्पष्ट करने का भी निर्देश दिया है।

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