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म्यूकोर्मिकोसिस (ब्लैक फंगस)–"महामारी के अंदर महामारी!"– क्या है? कैसे फैलती है?क्या है रोकथाम के उपाय? अन्य महत्त्वपूर्ण जानकारियां...

कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के बीच ब्लैक फंगस का कहर बढ़ता जा रहा है। एक्सपर्ट के मुताबिक डायबिटीज मरीजों को ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने की दरकार बढ़ गई है।कई एक्सपर्ट्स ब्लैक फंगस के खतरे से बचने के लिए जरूरी जानकारियां दे रहे हैं।

ब्लैक फंगस क्या है 

यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (CDS) के अनुसार mucormycosis एक गंभीर लेकिन दुर्लभ कवक रोग हैै। आमतौर पर यह उन लोगों को संक्रमित करता है जिनके इम्यून सिस्टम से समझौता किया गया हो। इस इंफेक्शन से सबसे बड़ा डर यह है कि यह तेजी से फैलता है और लोगों की आंखों की रोशनी चली जाती है या कुछ अंग काम करना बंद कर देते हैं। अगर यह दिमाग में फैल गया तो इसका इलाज करना बहुत कठिन हो जाता है।कैंसर को जानलेवा प्रभाव देने में कुछ महीने लगते हैं जबकि इससे कुछ दिनों या घंटों में जान जा सकती है।
  म्यूकर से संक्रमित लोगों में मृत्यु दर लगभग 50 से 70% तक हो सकती है। अगर एक हद से ज्यादा संक्रमण फैल गया तो मरीज को बचा पाना असंभव होता है। इसे और खतरनाक बनाती है इसके शरीर में फैलने की तीव्रता। इतना खतरनाक होने पर भी अभी तक इस को इतना भयानक नहीं माना जाता था। यह दुर्लभ रोग किसी व्यस्त सेंटर पर भी 3 से 4 साल में कभी एक मामला आता था।लेकिन कोविड मरीजों में स्टेरॉइड के उपयोग से ब्लैक फंगस के मामले बहुत बढ़ गए हैं।

 Mucormycosis कोई नई बीमारी नहीं है।ब्लैक फंगस हमेशा से ही वातावरण में मौजूद है। खासकर मिट्टी में इसकी मौजूदगी ज्यादा होती है यह कोरोना की तरह छूने या संपर्क में आने से नहीं फैलता है।

देश में बुधवार तक करीब 5500 लोगों में ब्लैक फंगस के संक्रमण की पहचान हो चुकी थी।जिसकी वजह से 126 लोगों की मौत भी हो चुकी थी। यही कारण है कि देश का स्वास्थ्य महकमा काफी सतर्क हो गया और आम लोगों को जागरूक करने में जुट गए। चिकित्सा विशेषज्ञ इसे कोविड-19 महामारी के भीतर महामारी कह रहे हैं। केंद्र ने राज्यों से इसे एक उल्लेखनीय बीमारी बनाने का अनुरोध किया है।कर्नाटक,उत्तराखंड,तेलंगना, मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, हरियाणा और बिहार में ब्लैक फंगस के संक्रमण का पता चला है। राजस्थान और हरियाणा सहित अन्य राज्यों ने मिलकर म्यूकोर्मिकोसिस को एक उल्लेखनीय बीमारी बना दिया हैै। जिससे अस्पतालों के लिए अधिकारियों को हर मामले की रिपोर्ट करना अनिवार्य हो जाता है। अस्पतालों से रिपोर्ट किए गए ब्लैक फंगस संक्रमण की संख्या पहली लहर में रिपोर्ट किए गए मामलों की तुलना में कम से कम 100 गुना बढ़ गई है। कोरोना से ठीक होकर घर जा चुके मध्यम तथा गंभीर मरीजों में 12 से 15 दिनों के बाद में म्यूकोर्मिकोसिस के संक्रमण को देखा जा रहा है।

*डायबिटीज मरीज हो जाए ब्लैक फंगस से सावधान! 
जाने माने चिकित्सा विशेषज्ञ एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया और मशहूर अस्पताल मेदांता के चेयरमैन नरेश त्रेहन नेेे बताया की जिन लोगों को अनियंत्रित डायबिटीज है और वह कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, उन पर ब्लैक फंगस के आक्रमण का खतरा बहुुुत ज्यादा होता है। दरअसल म्यूकर उन्हीं लोगों पर अटैक कर पाता है जिनकी इम्यूनिटी अत्यधिक कमजोर होती है। चूंंकि डायबिटीज मरीज स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल करते हैं इसीलिए उनकी इम्यूनिटी लेवल कम हो जाता है और ब्लैक फंगस की पकड़ में आ जाते हैंं। 
स्वस्थ और मजबूत इम्यूनिटी वाले लोगों पर यह अटैक नहीं कर पाता।

किस तरह के लोगों को है ज्यादा खतरा 
डॉक्टर त्रेहन के अनुसार 
✓ जिन मरीजों का स्टेरॉइड ट्रीटमेंट चल रहा हो, स्टेरॉइड की हाईडोज या लंबे वक्त तक स्टेरॉयड दी गई हो, तो उनमें mucor होने का खतरा बढ़ जाता है।क्योंकि स्टेरॉइड्स हमारी इम्यूनिटी को कम करता है और इसमें ब्लड शुगर लेवल बढ़ाने की प्रवृत्ति होती है। जिनको डायबिटीज नहीं है, उनमें भी स्टेटरॉइड, इंफेक्शन को फैलने के लिए अनुकूल इन्वायरमेंट बना सकता है।
✓ कैंसर रोगियों को, टीवी रोगियों को, एचआईवी–ऐड्स वालों को,अंग ट्रांसप्लांट करवाने वालों कोऔर उन सबको जो इम्यून सप्रेसेंट थेरेपी पर हैं, उनको mucor होने का खतरा हमेशा से ही रहता था।
#स्वस्थ और मजबूत इम्यूनिटी वाले लोगों पर यह फंगस अटैक नहीं कर पाता।

एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोविड मरीजों को शुरुआती चरणों में स्टेरॉइड लेने से संबंधित नुकसान के बारे में बताया था।
"कई लोग शुरुआती चरणों में स्टेरॉयड के हाइडोज लेने लगते हैं इसकी वजह से वायरस तेजी से अपनी संख्या बढ़ा सकता है। जिन लोगों में कोरोना वायरस लक्षण कम है, उनमें भी वायरस का, फेफड़ों तक फैलने के कारण के वायरल निमोनिया के गंभीर मामले आ सकते हैं।"

जरूरी नहीं है की हर एक "स्टेरॉयड बेस्ड ड्रग्स" म्यूकोर्मिकोसिस का खतरा पैदा करें! मुख्यता सिस्टमिक स्टेेरॉयड का प्रयोग mucor का खतरा बढ़ा देती है। अभी Dexamethasone और Methylprednisolone  सिस्टमिक स्टेेरॉयड है, जिनका उपयोग उपचार में किया जा रहा है। ये ड्रग्स सरकारी गाइडलाइन द्वारा मॉडरेट कोविड के उपचार का हिस्सा हैै। और ऑक्सीजन के अलावा कोविड का प्रभावी उपचार माने जाते हैं।
रिकवरी ट्रायल में इन ड्रग्स को हॉस्पिटलाइज्ड कोविड मरीज व रेस्पीरेटरी फेल्योर के कारण जिनको बाहरी ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की जरूरत थी,उनमें बहुत प्रभावी पाया गया है।
प्रारंभिक कोविड उपचार के लिए  Cortico steroid Budensonide सुझाया गया हैै। इसे इन्हेल  किया जाता है। तथा इससे म्यूकोर्मिकोसिस होने का  खतरा नहीं है। क्योंकि इन्हेंल्ड Budesonide सिस्टमिक नहीं है।यह लोकल इंफेक्शन कर सकता है। ये श्वास नली पर परतनुमा बिछ जाता है जो लोकल फंगस इंफेक्शन (ओरल कैविटी) का कारण बन सकता हैै। जोकि इतना घातक नहीं है। लेकिन म्यूकर केेेेे होने की संभावना न के बराबर हो जाती है।

सावधान!
कोई भी मरीज अपनी मर्जी से स्टेरॉयड न ले। स्टेरॉयड ऐसी दवा नहीं है, जो बिना डॉक्टर की सलाह और देखरेख के ली जाए। स्टेरॉयड की टाइमिंग और ड्यूरेशन बहुत महत्वपूर्ण है। विशेषकर कोविड मामलों में। शुरुआती 5 से 7 दिनों में स्टेरॉयड नहीं लेना चाहिए। उसके बाद भी मरीज की हालत देखकर यह निर्णय डॉक्टर को लेना चाहिए। उपचार में स्टेरॉयड इस्तेमाल बहुत सोच समझ कर किया जाना चाहिए।

ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षण व इलाज 

साइनोसाइटिस (नाक बंद होना या नाक से काले       म्यूकस का डिस्चार्ज होना)
• तालु की ऊपरी सतह काली दिखना
• सिर दर्द होना
• चेहरे के एक हिस्से में दर्द महसूस होना 
• चेहरे का सुन्न पड़ जाना 
• चेहरे का रंग बदल रहा हो
• पलकों का सूजना व झड़ने लगना 
• त्वचा पर चकत्ते आना 
नैक्रोसिस यानी किसी अंग का गलना 
• दांत ढ़ीले हो जाना, जबड़े में भी कुछ दिक्कत होना
 
अगर ब्लैक फंगस आपके फेफड़ों तक पहुंच गया है, तो यह लक्षण दिखेंगे 
• बुखार 
• सांस लेने में दिक्कत होना 
• कफ 
• खंखार मेंं खून आना
• सीने में दर्द 
• धुंधला दिखाई देना 
यह लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
 शुरुआत में पता लगने पर दवाइयों से भी इलाज हो सकता है। कुछ मौकों पर सर्जरी भी करनी पड़ती है। यह नाक व मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश करता है।दूसरे चरण में यह आंख को प्रभावित करता है और तीसरे चरण में यह दिमाग पर अटैक करता है। चार से छह हफ्तों तक दवाइयां लेनी पड़ सकती हैं। गंभीर मामलों में तीन  महीने तक इलाज चलता है। इसीलिए अगर आप को डायबिटीज है और कोरोना से संक्रमित हो गए हैं तो अपना ब्लड शुगर नियमित तौर पर चेक करते रहें और शुगर की दवाई बिल्कुल संभल कर ले।

अफवाहों पर ध्यान ना दें 
¶ कुछ कच्चा खाने से फंगल इंफेक्शशन हो रहा है।
¶ जहांं तहां से लाए गए सिलेंडर से, करोना मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट देने केेे कारण 
¶ किसी खास स्थान पर ही हो रहा है,हकीकत यह हैै कि आइसोलेशन में रह रहे कोरोना मरीज में फंगल इंफेक्शन देखा जा रहा है।

रोकथाम के उपाय
डॉक्टर नरेश त्रेहन ने कहा कि इस बीमारी को जितनी जल्दी पहचानेंगे, इसका इलाज उतना ही सफल होगा। डॉक्टर गुलेरिया के अनुसार ब्लैक फंगस की रोकथाम के लिए तीन चीजें बहुत महत्वपूर्ण है।
# शुगर कंट्रोल– खून में चीनी की मात्रा बढ़ने नहीं दें। जो लोग डायबिटिक हैं, उन्हें ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने का अतिरिक्त प्रयास करना चाहिए। 
•जो डायबिटिक नहीं है लेकिन नियमित तौर पर  स्टेरॉयड्स ले रहे हैं उन्हें अपना ब्लड शुगर हमेशा चेक करते रहना चाहिए। 
# सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक ही स्टेेरॉयड दिया जाए।
# स्टेेरॉयड का बेजा इस्तेमाल  स्टेेरॉयड देेनेेे से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर स्टेेरॉयड की कम डोज देंं ना कि बहुत ज्यादा।

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